पितृ दोष निवारण सेवाएँ
पितृ दोष एक गंभीर ज्योतिषीय दशा है जो पूर्वजों के प्रति कर्म के ऋण को कम करने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। यह जीवन में अनेक समस्याओं का मूल कारण हो सकता है।
हमारे द्वारा पूर्वज मुक्ति और पंच महाभूत शुद्धि जैसे शुद्ध अनुष्ठान की जाती है, उस पर भरोसा है।
पितृ दोष (Pitru Dosh) क्या है?
परिभाषा
पितृ दोष को पितृ-दोष, पितृ-रिण, सपिण्दोष, या पितृ-दोष भाग भी कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक व्यक्ति के जीवन में पूर्वजों के कर्म से उत्पन्न या शेष नकारात्मक प्रभाव दिखाई देता है।
मुख्य कारण
- जीवन में निरंतर बाधाएँ और असफलताएँ।
- विवाह और व्यावसायिक संबंधों में समस्याएँ।
- स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ।
- आर्थिक और कानूनी संकट।
अर्थ और उदेश्य
पूर्वज = आपके वंश में आपके पूर्वजन्म का साक्षात्कार भाग (पिता, दादा, नाना)।
मुक्ति = मुक्ति; अर्थात मुक्ति करना या पूर्ण समाधान देना।
उदेश्य: पूर्वजों के कार्मिक भार (ऋण) को उचित देवता या ब्रह्मा को समर्पित करने का अनुष्ठान।
विशेषताएँ
- यज्ञ विश्वास और कर्म: यह अनुष्ठान वैदिक दर्शन और ज्ञान के अनुरूप गहराई आस्था को मानता है।
- जाति के रूप में निवारण: अग्नि, गोबर, मछली या किसी भी जीव रूप से की जाती है।
- प्रारंभिक समाधान: दुर्गा पूजा और मंत्र जाप के साथ अनुष्ठान किया जाता है।
महत्वपूर्ण
भूत: = जो घटता चुकी है (अस्तीता)।
शुद्धि: = शुद्ध होने की प्रक्रिया।
पंच महाभूत: = पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश – जो प्रकृति का निर्माण करते हैं।
उद्देश्य
देहांताववादिक क्रिया कलापों के साथ यह किया जाता है कि मानव रूप से बेचे गए पूर्वजों और जातियों को अपनी यात्रा का मार्गदर्शन प्राप्त हो।
| विशेषता | भूत शुद्धि | पूर्वज मुक्ति |
|---|---|---|
| स्तर | व्यक्तिगत अस्तीता का शोधन | दिव्य आध्यात्मिक मुक्ति |
| लक्ष्य | दैहिक और आध्यात्मिक शुद्धि | समग्र विकास और वृत्ति की ओर बढ़ावा |
| प्रक्रिया | दान, तर्पण, पांचगव्य के उपयोग | मंत्र जाप, यज्ञ, दीक्षा और तर्पण |
| समयावधि | सप्ताह या श्राद्ध तिथियों पर किया जाता है | शुभ मुहूर्त और दिव्य समय पर आधारित है |
✨ महत्वपूर्ण: पूर्वज मुक्ति और भूत शुद्धि को आममने एक साथ किया जाता है, ताकि कर्म के बंधन से संपूर्ण स्वतंत्र प्राप्त हो।
| प्रकार | कारण | उपचार (राहत) | समाधान | |
|---|---|---|---|---|
| कालसर्प दोष | शनि का सर्वाधिक ग्रह के नक्षत्र में होना | अशांति, क्रोध, जीवन में बाधा | शनि पूजा, जप, रत्न | कर्मजन्य शांति |
| पितृ दोष श्राद्ध दोष | मंगल या शनि का अपशुद्ध निर्धारण | स्वास्थ्य समस्याएँ, पारिवारिक कलह | नारायण बलि पूजा | अपशुद्धि पूजा |
| अमावस्या तिथि दोष | जाति के अमावस्या तिथि का होना | चिकन, मानसिक बीमारी, वंश | चांद्र शांति मंत्र | आध्यात्मिक स्वास्थ्य सुधार |
| जातक योग दोष | जातक या दुष्कर्म के कारण | सफलता में बाधा, शत्रु | नारायण सेवा | राहत मुक्ति, दान |
श्राद्ध कर्म
- विशिष स्थल पर श्राद्ध यज्ञाचार्य द्वारा पूजा।
- सामग्रिक अवसर (जाप, मंत्र) का संग्रह।
- पिंड दान (घी, कपड़े, वस्त्र)।
- ब्राह्मण भोजन और कर्मजन्य शांति।
जल संस्कार
- पवित्र जल में स्नान करना।
- विशिष नदियों पर दीप जलाना।
- पितृ दोष वापस स्नान (काल सर्प)।
- पवित्र तीर्थ पर अर्पण करना।
पितृ दोष निवारण पूजा
- सूर्य ग्रह से जुड़े शिलाख लेना।
- केतु ग्रह के बीज का दान।
- श्री यम को रक्षा दाना।
- पितृ देवताओं को प्रार्थना करना।
नारायण शांति
- सप्ताह अनुष्ठान (श्रावण) में पांच दही तर्पण।
- गायत्री मंत्र का संग्रह।
- हवन या श्मशान में अनुष्ठान।
- ब्राह्मण मुक्ति का दान।
आध्यात्मिक सुधार
- रुद्राक्षी या पहन।
- यज्ञोपदेश (जनेऊ) का आयोजन।
- सकारात्मिक वातावरण ग्रंथ पाठ।
- बीज मंत्र जाप।
जैविक उपचार
- दान और दवा का कार्म ज्ञान योग अनुसार।
- वृद्धि सूत्र पद्धति का सेवन।
- जल, गाया, गोभर आदि का सात्विक निपुण।
निष्कर्ष
भूत शुद्धि और पूर्वज मुक्ति का अंतिम लक्ष्य जीवन में सकारात्मिक शांति, शांति, और सुख दाना है। हमारी सेवाओं का उद्देश्य यह है कि व्यक्ति संसार, शांत और सुखी जीवन जी सकें। इन वैदिक क्रियाओं को एक ही छत के तहत अनुभव और श्रद्धा के साथ करना अति आवश्यक है।
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