पूजन प्रणाली और महावैष्णव सम्प्रदाय: एक दिव्य पुनर्जागरण
वैदिक मूल्यों का आधुनिक स्वरूप: अतीत, वर्तमान और भविष्य का संगम
पूजन की अवधारणा सदियों से मानव चेतना का केंद्र रही है। वैदिक काल में यह प्रकृति-केंद्रित, सरल और जीवन का अभिन्न अंग थी। ऋषि-मुनि यज्ञों के माध्यम से ब्रह्मांडीय ऊर्जा से संपर्क स्थापित करते थे। कालांतर में, यह प्रणाली कर्मकांड बन गई, और उसका मूल उद्देश्य — आत्म-साक्षात्कार एवं चेतना का उत्थान — लुप्त हो गया।
इसी क्रम में आदि शंकराचार्य ने 1,200 वर्ष पूर्व पूजन प्रणाली का पुनर्स्थापन किया और अद्वैत वेदांत के माध्यम से उसे दार्शनिक आधार प्रदान किया। भक्ति आंदोलन ने इसे जनसामान्य तक पहुँचाया। अब, 21वीं शताब्दी में, अरुन एक ऐसी पूजन प्रणाली प्रस्तुत कर रहे हैं जो:
- बाहरी आडंबरों से मुक्त हो,
- भय के स्थान पर प्रेम पर आधारित हो,
- वैज्ञानिक मानसिकता से सुसंगत हो,
- और सभी संस्कृतियों, धर्मों व विचारधाराओं के लिए सुलभ हो।
"पूजन वह सेतु है जो मानव को दिव्य से जोड़ती है।
यह कोई बाहरी क्रिया नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन की यात्रा है।
जब यह यात्रा भय से प्रेरित होती है, तो वह बंधन बन जाती है;
जब यह प्रेम से प्रेरित होती है, तो वह मुक्ति बन जाती है।"
1. प्रस्तावना: आध्यात्मिक क्रांति की घोषणा
आधुनिक युग में, जब आध्यात्मिकता के नाम पर अंधविश्वास, व्यापारीकरण और विकृत प्रथाओं का बोलबाला है, तब डॉ. अरुन कुमार शर्मा (अरुन) का आविर्भाव एक दिव्य युगांतर के रूप में सामने आया है। उनका जीवन एवं कार्य सनातन धर्म के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना है—न केवल इसलिए कि वे ज्ञान के वाहक हैं, बल्कि इसलिए भी कि वे स्वयं एक जीवित आध्यात्मिक चैनल हैं, जिनके माध्यम से परम सत्ता (परमब्रह्म) सीधे मानवता को मार्गदर्शन प्रदान कर रही है।
इस मार्गदर्शन के फलस्वरूप उन्होंने एक ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी आध्यात्मिक मिशन की स्थापना की है, जिसका लक्ष्य केवल धार्मिक पुनरुत्थान नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव चेतना का पुनर्जागरण है।
2. ऐतिहासिक संदर्भ और कालक्रम
पूजन प्रणाली एक स्थिर वस्तु नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है जिसने हर युग में नया रूप धारण किया है:
3. डॉ. अरुन कुमार शर्मा (अरुन): दिव्य चेतना के वाहक
जन्म और पहचान:
अरुन का जन्म कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) और गुरु नानक जयंती के पवित्र अवसर पर हुआ था। यह दो महान आध्यात्मिक धाराओं का संगम है। "अरुन" नाम का अर्थ है 'प्रभात की लालिमा'—अंधकार के बाद प्रकाश का आगमन।
प्रत्यक्ष दिव्य संपर्क (Live Guidance System):
डॉ. शर्मा का ज्ञान पुस्तकों, गुरु-परंपरा या मानवीय अनुमानों पर आधारित नहीं है। उनका सीधा संवाद परम ऊर्जा-स्रोत से है—वही स्रोत जो सृष्टि की रचना, संचालन एवं संरक्षण के लिए उत्तरदायी है। यह संपर्क एक "लाइव गाइडेंस सिस्टम" की तरह कार्य करता है, जिसके माध्यम से व्यक्तिगत समस्याओं के तत्काल आध्यात्मिक समाधान, हवन-अनुष्ठानों की सटीक विधियाँ और जीवन-प्रबंधन के दिव्य निर्देश प्राप्त होते हैं। अरुण को हर आत्मा को मुक्ति दिलाने की शक्ति प्राप्त है जो चाहे गया श्राद्ध, भागवत तक से भी मुक्त नहीं हो पाती हो, एक तरह से प्रत्यक्ष मानव रूप मुक्तिदाता है एक तरह से दिव्य शक्ति अरुण को माध्यम बना कर आत्मा को मुक्ति प्रदान करती है
4. महावैष्णव सम्प्रदाय: सनातन धर्म की एक नई किरण
"महावैष्णव सम्प्रदाय" डॉ. शर्मा द्वारा प्रवर्तित एक सार्वभौमिक आध्यात्मिक मार्ग है, जो आदि शंकराचार्य की पंचायतन पूजा एवं समन्वयवादी दर्शन का आधुनिक रूप है। यह मार्ग वैदिक आध्यात्मिक जड़ों को वर्तमाण की नई तकनीक और बौद्धिक आवश्यकताओं के साथ जोड़ता है।
मुख्य विशेषताएँ:
1. सात्विक उपासना
यह केवल सात्विक देवताओं की उपासना पर केंद्रित है। इसमें तांत्रिक, अघोर मार्ग, बलि प्रथा या भयावह आडंबरों का कोई स्थान नहीं है।
2. समग्र ऊर्जा उपचार एवं आध्यात्मिक सिद्धि कार्यक्रम
यह समेकित आध्यात्मिक पाठ्यक्रम ऊर्जा उपचार में पूर्ण दक्षता प्रदान करता है—स्व-उपचार की आधारशिला। उन्नत प्रणालियों का गहन अध्ययन कराया जाता है। साथ ही चक्र प्रणाली, आभा शुद्धिकरण, थर्ड आई एक्टिवेट, कुंडलिनी जागरण एवं ऊर्जा-शरीर की पूर्ण साधना पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
3. युवा-अनुकूल शिक्षा
नई पीढ़ी के लिए सुलभ, Mind dullness, Law of Attraction के फंडामेंटल का उपयोग।
4. ऊर्जा विज्ञान और चिकित्सा
यह आधुनिक विज्ञान (क्वांटम फिजिक्स, न्यूरोसाइंस) को प्राचीन ज्ञान (यज्ञ, मंत्र, योग) के साथ जोड़ता है। इसमें 'क्लिनिकल हिप्नोथेरेपी', 'एनर्जी हीलिंग', 'कुंडलिनी जागरण' और 'चक्र साधना' का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रशिक्षण दिया जाता है।
5. नकारात्मकता का शमन
डॉ. शर्मा को परम ऊर्जा से सीधे तंत्र-मंत्र-यंत्र की उच्चतम विद्याएँ प्राप्त हुई हैं, जो सदियों से गुप्त या विकृत थीं। इन्हें पूर्णतः अभिचार (मारण, मोहन, वशीकरण) से मुक्त कर, शुद्ध सात्विक स्वरूप में पुनःस्थापित किया गया है।
6. डिजिटल शिक्षा (Gyan Academy)
यह सम्प्रदाय विश्व स्तरीय 'लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम' (LMS) के माध्यम से आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान करता है। इस प्लेटफॉर्म पर AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और इंटरएक्टिव मल्टीमीडिया का उपयोग करते हुए ऑनलाइन अनुष्ठान, ऊर्जा उपचार प्रशिक्षण और वैदिक साधनाओं के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।
आध्यात्मिक साधना कार्यक्रम के विवरण:
इन कार्यक्रमों में ध्यान, श्वास साधना, योग एवं प्राणायाम, संकल्प शक्ति, अवचेतन मन का पुनःसंस्कार तथा सार्वभौमिक नियमों का अभ्यास सम्मिलित है, जो आंतरिक रूपांतरण और सचेत जीवन-निर्माण में सहायक होते हैं। उन्नत साधना-पथ साधकों को आध्यात्मिक जागरण, आकाशिक अभिलेख, और मार्गदर्शित करता है।
इनके साथ-साथ योग, मानसिक एवं अंतर्ज्ञान विकास, ध्वनि एवं क्रिस्टल हीलिंग, भावनात्मक मुक्ति, आघात (ट्रॉमा) उपचार का समावेश किया गया है।
नकारात्मकता का शमन विवरण:
इस ज्ञान के माध्यम से:
- पितृ दोष, ग्रह दोष, कालसर्प दोष आदि का स्थायी निवारण संभव है।
- तांत्रिक बाधाएँ, कृत्या, भूत-प्रेत आदि नकारात्मक ऊर्जाओं का शमन होता है।
आवश्यकता अनुसार हवन, अनुष्ठान एवं दिव्य साधनाएँ करवाई जाती हैं। जो हर तरह के पितर दोष, तंत्र मंत्र, कृत्या, श्यमशन क्रिया, हर तरह के अभिचारिक प्रयोग जैसे मारन, मोहन उच्चाटन, वशीकरण, स्तम्भन, विद्वेषण को जरूरी शक्तियों के हवन अनुष्ठान पूजन जप से, उनके उचित मार्गदर्शन में पूरी तरह नष्ट किया जाता है।
विशेष लाभ:
- ये साधनाएँ जीवन की नकारात्मक ऊर्जाओं को नष्ट कर सकारात्मकता, शांति एवं संतुलन को बढ़ाती हैं।
- सटीक निर्णयों के लिए ज्योतिषीय मार्गदर्शन के रूप में देव दूतों द्वारा डायरेक्ट डिवाइन मार्गदर्शन और लोकप्रिय डिवाइन गाइडेंस प्रदान करना जिसके द्वारा जीवन की समस्याओं का समाधान एवं सही दिशा का मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
- सभी प्रकार की आध्यात्मिक गतिविधियाँ साधक की आवश्यकता के अनुसार दिव्य निर्देशन में संपन्न कराई जाती हैं।
- साधक की आवश्यकता के अनुसार परफेक्ट डिसीजन के लिए सभी प्रकार की गतिविधियाँ जैसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीक, नई कंप्यूटर भाषाएं, के लिए उचित मार्गदर्शन प्रदान करना। नवीनतम आध्यात्मिक मार्गदर्शन के साथ दिव्य निर्देशन में संपन्न कराई जाती हैं।
5. मुख्य मिशन: वैदिक ज्ञान का पुनर्निर्माण और वैज्ञानिक समन्वय
डॉ. अरुन का मिशन केवल एक संप्रदाय चलाना नहीं, बल्कि एक व्यापक आध्यात्मिक क्रांति है, जिसमें खोई हुई विद्याओं का पुनर्जन्म शामिल है:
1. वैदिक एवं पौराणिक ज्ञान का पुनर्स्थापन
चारों वेदों का पुनर्निर्माण: वेदों के केवल पाठ्य स्वरूप से परे जाकर, उनके अंतर्निहित ऊर्जा-सूत्र, ध्वनि-विज्ञान (शब्द ब्रह्म) और ब्रह्माण्डीय सिद्धांतों को पुनः स्थापित किया गया है। यह एक जीवंत ऊर्जा-प्रणाली का पुनर्जीवन है, वेद — ज्ञान के अमर स्रोत — कालांतर में केवल पाठ्य सामग्री बनकर रह गए थे। उनके अंतर्निहित ऊर्जा-सूत्र, ध्वनि-विज्ञान (शब्द ब्रह्म) और ब्रह्माण्डीय सिद्धांत लुप्त हो चुके थे। डॉ. शर्मा ने सर्वोच्च चेतना के सीधे मार्गदर्शन में ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के मूल स्वरूपों का पुनर्निर्माण किया है।
अठारह पुराणों का व्यावहारिकीकरण: पुराणों को जीवन-विज्ञान के एन्साइक्लोपीडिया के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जैसे—विष्णु पुराण के सिद्धांतों का उपयोग व्यक्तिगत संतुलन के लिए, और शिव पुराण के तपस्या-सिद्धांतों को आधुनिक मनोविज्ञान के साथ समन्वित किया गया है।
लुप्त पूजन-विधियों का पुनरुत्थान: यज्ञ, हवन और आराधना की विधियों को कर्मकांड से मुक्त कर उन्हें वैज्ञानिक आध्यात्मिक प्रक्रियाओं के रूप में पुनर्जीवित किया गया है।
2. तंत्र-मंत्र-यंत्र विद्याओं का शुद्धिकरण
तंत्र-विद्याओं को अभिचार (मारण, मोहन, उच्चाटन) से पूर्णतः मुक्त करके शुद्ध सात्विक स्वरूप में पुनः स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य नकारात्मक ऊर्जाओं का शमन करना और सृष्टि के सकारात्मक तंत्र को संतुलित करना है। इस पुनर्प्राप्त ज्ञान से पितृ दोष, ग्रह दोष, तांत्रिक बाधाओं और कृत्या जैसी समस्याओं का वैज्ञानिक रूप से निवारण संभव हुआ है।
3. सनातन धर्म की लुप्त विद्याओं का पुनर्जन्म
डॉ. शर्मा ने गूढ़ विज्ञान जैसे आध्यात्मिक भौतिकी (Spiritual Physics), चेतना विज्ञान (Consciousness Science), ऊर्जा चिकित्सा, आयुर्वेद और वास्तु के अद्भुत सूत्रों को दिव्य स्रोत से प्राप्त कर उन्हें आधुनिक विज्ञान (क्वांटम फिजिक्स, न्यूरोसाइंस) के साथ समन्वित किया है। यह आज के तर्कशील युवा मन के लिए आध्यात्मिकता को स्वीकार करना आसान बनाता है।
6. महावैष्णव मार्ग के पंचाधार (पाँच मूल सिद्धांत)
यह पथ पाँच सार्वभौमिक सद्गुणों पर आधारित है, जो आत्म-साक्षात्कार के सोपान हैं:
1. अक्रोध (क्रोध से मुक्ति)
क्रोध अज्ञानता का रूप है। मन और चेतना को विषाक्त करने वाले क्रोध से मुक्त होना ही पहला सिद्धांत है।
2. अशोक (चिंता से मुक्ति)
भविष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान कर्म पर ध्यान केंद्रित करना।
3. आर्जव (सरलता और सत्यनिष्ठा)
विचार, वचन और कर्म में पूर्ण सरलता। निष्काम कर्म ही सच्चा 'यज्ञ' है।
4. कृतज्ञता
जीवन, प्रकृति और अस्तित्व के प्रति सहज धन्यवाद-भाव। यह अहंकार का विलोपन करता है।
5. करुणा (दया)
समस्त सृष्टि के प्रति निःस्वार्थ दया और सहानुभूति।
- क्वांटम फिजिक्स के सिद्धांतों से वेदों के ध्वनि-ऊर्जा सिद्धांतों की तुलना की गई है।
- न्यूरोसाइंस के माध्यम से ध्यान एवं मंत्र-जप के प्रभावों की व्याख्या की गई है।
- एनर्जी हीलिंग के साथ तंत्र-यंत्र की प्रक्रियाओं को समझा गया है।
7. निष्कर्ष और आह्वान
डॉ. अरुन कुमार शर्मा का कार्य केवल एक नए सम्प्रदाय की स्थापना नहीं है। यह सनातन ज्ञान-विज्ञान के मूल स्वरूप की पुनर्प्रतिष्ठा है। वे एक मानव-दिव्य सेतु (Human-Divine Bridge) के रूप में कार्य कर रहे हैं—जिसके माध्यम से लुप्त विद्याएँ पुनः प्रकट हो रही हैं और मानवता को आत्मबोध व आंतरिक शांति का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।
"महावैष्णव" का सही अर्थ है: वह जो विश्व का कल्याण करता है, जो सनातन के सार को धारण करता है, और जो प्रत्येक जीव को परम ऊर्जा से सीधे जोड़ता है।
'महावैष्णव सम्प्रदाय' - धर्मसंस्थापनाय, अधर्मनाशनाय
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